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शालमली खोलगडे ने अपनी शुरूआत, गायन व नृत्‍य के प्रति अपने प्‍यार व अन्‍य चीजों के बारे में चर्चा की

published time By Liveinstyle published time 14 Feb, 2018 Share image 0 Shares

इश्‍कजादे के 'परेशान परेशान' ट्रैक से स्‍टारडम मिलने तक,शालमली खोलगडे स्‍वयं स्‍वीकार करती हैं कि उन्‍हें बॉलीवुड के बारे में बहुत थोड़ा पता था। 'डिस्‍परेडो' बाय द ईगल्‍स की प्रस्‍तुति के बाद, वो मुंबई के कॉलेज सर्किट की एक लोकप्रिय नाम बनीं। इस युवा गायिका को वही काम करना अच्‍छा लगता है, जिसमें इन्‍हें सबसे अधिक मज़ा आता है।उन्‍होंने मुंबई के आउट ऑफ द ब्‍लू नामक रेस्‍तरां में कम ऑडियंस के सामने गाना गाना शुरू किया। संगीत के क्षेत्र में अधिक से अधिक ज्ञान हासिल करने की अपनी लालसा से प्रेरित होकर, उन्‍होंने अमेरिका के एक म्‍यूजिक स्‍कूल में अप्‍लाई किया, लेकिन जीवन ने उनके लिए अलग योजनाएं बना रखी थीं। तभी उन्‍हें बॉलीवुड से कॉल आया और उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव हुआ।

Shalmali

आज मात्र 28 वर्ष की शालमली के खाते में लोकप्रिय गानों की एक लंबी सूची है, जो किसी भी डांस फ्लोर पर धमाल मचा देने के लिए काफी हैं। यद्यपि उनके बॉलीवुड के गाने जैसे दारू देसी (2012),लत लग गई (2013),बलम पिचकारी (2013) और बेबी को बास पसंद है (2016) समीक्षात्‍मक एवं व्‍यावसायिक रूप से काफी सफल रहीं, फिर भी इस मराठी मुलगी का कहना है कि अच्‍छा होता कि उन्‍हें उनके ओरिजनल नॉन-फिल्‍मी म्‍यूजिक एलबम के लिए जाना जाता- जिन पर वो उत्‍साहजनक रूप से काम कर रही हैं। 

हाल ही में, शालमली सिग्‍नेचर स्‍टार्टअप मास्‍टरक्‍लास सीरीज के लिए गोवा में थीं। यह सीरीज उन लोगों को समर्पित है जिन्‍होंने साहस के बल पर मुश्किलों पर विजय पाई है और जिन्‍होंने अपने दिल की आवाज सुनने को ठान लिया है। यह प्रेरणादायी सीरीज ऑडियंस को अनूठा अवसर प्रदान करती है, ताकि वे जान सकें कि उनके आदर्श व्‍यक्तियों ने किस तरह से अपने जुनून से सफलता हासिल की। 

गोवा में सिग्‍नेचर स्‍टार्टअप मास्‍टरक्‍लास सीरीज में जाने से कुछ पल पहले लीवइनस्‍टाइल के साथ एक सीधी बातचीत में, शालमली ने अपने संगीत के सफर के बारे में बताया, उन्‍होंने अपने द्वारा सामना की गई चुनौतियों और अपनी भावी योजनाओं के बारे में बताया। उनके साक्षात्‍कार का कुछ अंश यहां दिया जा रहा है: 

आप एक प्रशंसित गायिका हैं और अब हम आपको सिग्‍नेचर स्‍टार्टअप मास्‍टरक्‍लास के दूसरे संस्‍करण में एक मेंटर के रूप में देखने जा रहे हैं। इस इवेंट में आपके प्रशंसकों को आप से क्‍या उम्‍मीद रखनी चाहिए?

यह अत्‍यंत सुस्‍पष्‍ट बातचीत होगी और मैं अपनी यादों को खंगालने जा रही हूं, ताकि उन घटनाओं का पता लगा सकूं जिन्‍होंने मेरी जिंदगी के एक हिस्‍से को आकार दिया। मुझे लगता है कि ऐसी कई कडि़यां और उदाहरण हैं जिन्‍होंने एक-एक कर मेरी जिंदगी को आगे बढ़ाया है। मेरे लिए छोटी-छोटी चीजें मायने रखती हैं, जैसे बातचीत के दौरान मेरे ऑडियंस में से किसी को कभी यह महसूस हो सकता है, जैसे,''ओह! यही वो जगह है जहां जिंदगी में मैं खड़ा हूं; और आगे मुझे यह काम करना चाहिए।''

इस इवेंट के लिए चुने गये लोगों के बीच अपना नाम देखकर आपकी प्रतिक्रिया कैसी रही?

मुझे आश्‍चर्य हो रहा था,''मैं क्‍या कहूंगी, मैं मात्र 28 साल की हूं; जिंदगी में अभी तक मैंने क्‍या किया है? क्‍या आप सचमुच मुझे चाहते हैं?'' (हंसती हैं)। लेकिन यह मेरे साथ सामान्‍य समस्‍या है। मुझे बहुत संदेह होता है। मैं जो कुछ भी करूंगी, उससे पहले दो बार सोचूंगी। लेकिन इस तरह के समय में, मेरे आसपास के लोग आते हैं और मुझे सही काम करने की ओर ले जाते हैं। जब फर्स्‍ट पर्सन के दृष्टिकोण से अपनी जिंदगी को देखते हैं,तो ऐसी छोटी-छोटी चीजें होती हैं जिन्‍हें आप भूल जाते हैं कि आपने किया, इस प्रकार वह 'संघर्ष' हो सकता है। मैं इस बातचीत में भाग लेने को लेकर और बोलने के लिए अत्‍यंत उत्‍साहित हूं। 

Shalmali

म्‍यूजिक इंडस्‍ट्री में अपनी शुरूआत के बारे में बताएं। क्‍या आपको ढेर सारी चुनौतियों, बाधाओं या अस्‍वीकृतियों का सामना करना पड़ा? और यदि हां, तो आपने उन पर विजय कैसे पाई?

मैंने संगीत की शुरूआत इसलिए की, क्‍योंकि यह मेरे घर का हिस्‍सा था...मेरी मां भारतीय शास्‍त्रीय संगीत पढ़ाया करती थी; मेरे पिता को संगीत सुनना अच्‍छा लगता है और वो गाते भी हैं। वह ऐसे गायक नहीं हैं जो श्रोताओं के सामने गाये, लेकिन उन्‍हें संगीत की समझ है। जब मेरे पिताजी गाते हैं, तो मुझे महसूस हो जाता है कि वो क्‍या गा रहे हैं। वो इस बात से बिल्‍कुल बेपरवाह होते हैं कि कौन सुन रहा है। वह बहुत ही महत्‍वपूर्ण चीज होता है। अब जब कि मैंने इसमें अपना कॅरियर बना लिया है, मैं कभी-कभी 'पिचिंग','हरकत'आदि के बारे में काफी सोचती हूं और अहसास कहीं खो गया होता है। बढ़ते हुए, मैंने देखा कि घर में हर जगह संगीत ही संगीत था। लेकिन संगीत का कॅरियर बनाने का ख्‍याल कॉलेज के दिनों में आया, जब मैं मुंबई के सेंट जेवियर में पढ़ रही थी। मैंने एकल गायन प्रतियोगिता में 'डिस्‍परेडो' बाय द ईगल्‍स को गाया। उसने मेरी जिंदगी बदल दी, क्‍योंकि वही वो गाना है जिसे मैंने महसूस किया मानो,'मैं ऐसा ही महसूस करना चाहती हूं। मैं अपनी शेष जिंदगी भर ऐसा ही महसूस करना चाहती  हूं।'' और मैंने वही किया। मैं हर जगह गा रही थी; मैंने सैकड़ों ऑडिशंस दिये, और संगीत से जुड़ी हर चीज़ की। दरअसल, शुरूआत वही से हुई और मैं संगीत का अध्‍ययन करना चाहती थी और अपनी खुद की संगीत लिखना चाहती थी और क्‍लब में इसे गाना चाहती थी। और अचानक बॉलीवुड आया और मेरे जीवन में किसी दूसरे शहर का दूसरा सफर शुरू हो गया। 

आज किसी भी प्‍लेबैक सिंगर के लिए सबसे बड़ी बाधा यह है कि हम जाते हैं और अनगिनत गाने गाते हैं; व‍ह गाना ढेर सारे लोगों द्वारा गाया जा चुका होता है और फिर स्‍पष्‍ट तौर पर गाने में एक पुरूष का स्‍वर हो सकता है और एक महिला का स्‍वर। तो चुनौती यह है कि आप एक स्‍थापित गायक या जानी-मानी आवाज होने के बाद हर गीत का आप ऑडिशन लेते हैं। इंडस्‍ट्री के हर गायक के सामने हमेशा से उसे स्‍वीकार करने की चुनौती रही है। लेकिन यह पूरी तरह से आपके नजरिये पर निर्भर करता है। जिस दिन मुझे महसूस हुआ कि मैं इस अवधारणा के साथ लंबे समय से फिट नहीं थी, मैंने स्‍वयं के बारे में सोचा,''मुझे अलग-अलग कंपोजिशंस गाने के लिए मिल रहे हैं, जिसका अर्थ है कि इस संदर्भ में कितनी आवाजें उचित बैठेंगी। और मैं उसी अनुभव के साथ आगे बढ़ रही हूं।'' तो मुझे इससे वही मिल रहा है। मुझे रिलीज नहीं बल्कि अनुभव मिल रहा है। ज्‍योंहि आपका नजरिया बदलता है, बाधाएं स्‍वयमेव हट जाती हैं। 

आप उन उभरते हुए प्रतिभाशाली गायकों/संगीतकारों को क्‍या सलाह देंगी, जो इस इंडस्‍ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए जूझ रहे हैं?

कोई भी व्‍यक्ति जो संगीत के क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहता है या म्‍यूजिक इंडस्‍ट्री में आना चाहता है,उनके लिए मेरी सलाह यही होगी कि वे विभिन्‍न तरह के संगीतों को सुनें। यह एक साथ गेम बदल देता है - यही चीज बेनी दयाल ने मुझसे कही थी। जब तक आपका दिमाग अलग-अलग क्षेत्रों के बारे में सोचना शुरू नहीं करता है, तब तक आप हर बार कुछ नया नहीं दे पायेंगे। मैं उन्‍हें परामर्श दूंगी कि वो अलग-अलग चीजों को आज़मायें, अलग-अलग तरह के संगीत को सुनें, सपने देखें, उम्‍मीद रखें और अपनी क्षमता को जानें। छोटे-छोटे लक्ष्‍यों के साथ बड़े-बड़े लक्ष्‍यों पर भी एक साथ काम करें।

सफलता की आपकी क्‍या परिभाषा है?

दरअसल, मैं आपको एक घटना का उदाहरण दूंगी, जब मैंने सफलता को महसूस किया - हाल ही की बात है। हमने दिल्‍ली में बीएमपी (बॉलीवुड म्‍यूजिक प्रोजेक्‍ट) किया, जो कि एक फेस्टिवल की तरह है। यह मेरा सपना रहा है और मैं अभी भी इस दिशा में काम कर रही हूं कि स्‍टेज पर मैं गाना गाउं और डांस करूं। बीएमपी में,मेरे पास बैंड था, रिहर्सल था, मेरे पास टीम थी जो मैटेरियल को जानती थी और मेरे पास इसे दर्शकों के सामने मंच पर प्रस्‍तुत करने के लिए समय था। आप जिन लोगों के सामने संगीत की प्रस्‍तुति दे रहे होते हैं, उनके चेहरे पर संतुष्टि का भाव और उनको मिलने वाली खुशी, मेरे लिए सफलता को परिभाषित करती है। क्‍योंकि जब शो के बाद मैं स्‍टेज से उतरकर नीचे आई, हर शख्‍स मानो यही कह रहा था,''प्रस्‍तुति शानदार थी! वह बहुत अच्‍छा लगा।'' हर व्‍यक्ति के चेहरे पर एक ही जैसी भंगिमा थी। हर आदमी उसी रौ में बह रहा था और उन्‍होंने इसे पूरी तरह से महसूस किया और हम अभी भी इस के बारे में बात करते हैं। फिर ये मायने नहीं रखता कि ऑडियंस ने इसकी कितनी प्रशंसा की, लेकिन वे हमेशा करते हैं।

क्‍या आपको कोई रोल मॉडल है या रहा है, जिससे आपको प्रेरणा मिलती है?

एमी विंगहाउस मेरी रोल मॉडल थी और जहां तक सांग राइटिंग, प्रस्‍तुतिकरण शैली और अरेंजमेंट स्‍टाइल का सवाल है, तो वो अभी भी मेरे लिए प्रेरणा-स्रोत हैं। साथ ही बियोंस (नोल्‍स) भी मेरी रोल मॉडल रही हैं, क्‍योंकि वो बहुत अच्‍छा गाती और नृत्‍य करती हैं। वह बहुत बड़ी प्रेरणा-स्रोत हैं।

साक्षात्‍कारकर्ता: किशोर अमाटी